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Source: iStock
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Carnegie India

अमेरिकी AI नीति के लिए आगे क्या?

इस लेख में डीरेगुलेशन के मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन और दूसरी प्रेरक ताक़तों के संभावित कदम, AI में अमेरिका की लीडरशिप, राष्ट्रीय सुरक्षा और AI सुरक्षा पर वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाया गया है।

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द्वारा शतक्रतु साहू और अमलान मोहंती
पर प्रकाशित 31 जन॰ 2025
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परियोजना

टेक्नोलॉजी एंड सोसायटी

यह कार्यक्रम पांच प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित है: डेटा गवर्नेंस और प्राइवेसी; सेमीकंडक्टर और रक्षा समेत रणनीतिक प्रौद्योगिकी; एआई और जैव सुरक्षा जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी; तेज़ विकास और राज्यों के बीच आपसी संवाद पर फोकस के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर; और महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकी पर भारत-अमेरिका पहल और यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद जैसी रणनीतिक साझेदारी।

और अधिक जानें

हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति के भविष्य को बिल्कुल फोकस में ला दिया है। ऐसे कई जटिल मुद्दे हैं, जिनमें नई नियुक्तियां, भू-राजनीतिक ताक़तों में बदलाव और संभावित AI सफलताएं शामिल हैं, नए राष्ट्रपति के तहत AI नीति को आकार देंगे।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नया एडमिनिस्ट्रेशन AI रेगुलेशन के लिए सीधा दखल देने की नीति नहीं अपनाएगा, एक्सपोर्ट कंट्रोल को सख्त करेगा, और अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा।

इस लेख में डीरेगुलेशन के मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन और दूसरी प्रेरक ताक़तों के संभावित कदम, AI में अमेरिका की लीडरशिप, राष्ट्रीय सुरक्षा और AI सुरक्षा पर वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाया गया है।

डीरेगुलेशन एजेंडा

सभी संकेत इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि ट्रम्प इनोवेशन को बढ़ावा देने और दुनिया भर में अमेरिकी प्रतिस्पर्धा शक्ति सुधारने के लिए डीरेगुलेशन पर फोकस करेंगे। उदाहरण के लिए, उम्मीद है कि ट्रम्प प्रशासन AI के सुरक्षित और भरोसेमंद विकास और उपयोग पर बाइडन के कार्यकाल के एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर (बाइडन EO) को निरस्त कर देगा - जैसा कि निर्वाचित राष्ट्रपति ने सार्वजनिक तौर पर एलान किया है और उनके चुनाव घोषणा पत्र में साफ़ तौर पर कहा गया है। पिछले साल अक्टूबर में लाया गया बाइडन EO एक कंप्रिहेंसिव रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है जिसमें संघीय एजेंसियों को AI के इस्तेमाल पर रिपोर्ट देना, टेस्टिंग प्रोटोकॉल लागू करना और जवाबदेही के उपायों को लागू करना अनिवार्य बनाया गया है।

बाइडन EO के निरस्त होने से दुनिया भर में AI गवर्नेंस पर असर पड़ेगा। मिसाल के लिए, भारत ने अपने AI गवर्नेंस ढांचे का मॉडल कार्यकारी आदेश पर आधारित किया है, और उसे अपने नज़रिए पर दोबारा सोचना पड़ सकता है।

संभावित तौर पर बाइडन EO के निरस्त होने के साथ ही AI जोखिमों को संभालने के लिए बाइडन काल की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएं महत्वपूर्ण हो जाएंगी। जहां दिगग्ज कंपनियों ने इन स्वैच्छिक ढांचों के तहत काम थोड़ा आगे बढ़ाया है, वहीं एक्सपर्ट्स ने इस बात की तरफ ध्यान दिलाया है कि इंडस्ट्री में इसे पूरे तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है।

नए प्रशासन में कंपनियां अपनी स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं से पीछे हट जाएंगी, इसकी संभावना नहीं है क्योंकि इनमें से कुछ - जैसे कि अब तक जारी नहीं हुए AI सिस्टम की सुरक्षा जांच - को बिज़नेस और पॉलिसी दोनों के लिए अनिवार्य माना जाता है। हालांकि, डीरेगुलेशन में ढील से कंपनियों पर दूसरे मुद्दों पर पारदर्शी होने का दबाव और कम हो सकता है, जैसे कि उनका गवर्नेंस स्ट्रक्चर और उनके AI सिस्टम का थर्ड-पार्टी ऑडिट।

AI नेतृत्व लक्ष्य, राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा

हालांकि ट्रम्प का डीरेगुलेशन एजेंडा कुछ मामलों में बाइडन से अलग है, लेकिन AI पर अमेरिकी लीडरशिप की चाहत और राष्ट्रीय सुरक्षा पर फोकस के मामले में दोनों राष्ट्रपतियों के बीच एक जैसी राय है।

2019 में राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रम्प ने आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने के मकसद से AI में अमेरिकी लीडरशिप बनाए रखने पर कार्यकारी आदेश (ट्रम्प EO) जारी किया था। ट्रम्प EO बाइडन के नेशनल सिक्योरिटी मेमोरेंडम ऑफ ऑक्टूबर 2024 (NSM) से मेल खाता है, जिसमें सप्लाई चेन डाइवर्सिटी एंड सिक्योरिटी, अगली पीढ़ी के सुपर कंप्यूटरों के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के भीतर AI को एकीकृत करने जैसे कदमों के ज़रिए AI पर अमेरिकी लीडरशिप को प्राथमिकता दी गई है। इन वजहों से संभावना बनती है कि ट्रम्प प्रशासन NSM के व्यापक लक्ष्यों और इसके "अमेरिका फर्स्ट" नज़रिए का सपोर्ट करेगा।

इसके अलावा, चीन पर फोकस करने वाले एक्सपोर्ट कंट्रोल्स के रफ्तार पकड़ने की संभावना है। इसमें हाई बैंडविड्थ मेमोरी 3 (HMB3) चिप्स जैसे बिल्कुल नए AI रिसोर्सेज़ पर पहले से ज़्यादा सख्त कंट्रोल्स हो सकते हैं। यह रिपोर्ट कि चीनी फौज मेटा के ओपन-सोर्स AI मॉडल लामा 2.0 का इस्तेमाल कर रही है, इस नीतिगत प्राथमिकता को और मज़बूत कर सकती है।

बेंगलुरु में कार्नेगी इंडिया के हाल ही में आयोजित ग्लोबल टेक्नोलॉजी समिट (GTS) इनोवेशन डायलॉग में "यूएस-इंडिया टेक पार्टनरशिप: अवसर" पर बंद कमरे में एक चर्चा की गई, जिसमें भारत और अन्य विकासशील देशों पर अमेरिका के एक्सपोर्ट कंट्रोल पाबंदियों के असर पर गौर किया गया, भले ही इन पांबदियों के निशाने पर ये देश ना हों। खास तौर पर, ओपन-सोर्स फाउंडेशन मॉडल पर एक्सपोर्ट कंट्रोल पाबंदियां भारतीय डेवलपर्स के लिए बड़े जोखिम पैदा करते हैं जो "सॉवरेन AI" सॉल्यूशन बनाने के लिए इन टूल्स पर निर्भर हैं। चर्चा में शामिल लोगों ने एक्सपोर्ट कंट्रोल के उपायों को लागू करने में तकनीकी मुश्किल पर ध्यान दिलाया, खास तौर पर पहले से ही बाहर आ चुके AI मॉडल के लिए। इसके साथ ही उन लोगों ने एक्सपोर्ट कंट्रोल पाबंदियां लगाने के बजाय ओपन-सोर्स मॉडल से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए AI गवर्नेंस में सहयोग बढ़ाने वाला नज़रिया अपनाने का सुझाव दिया।

AI सुरक्षा पर बहुपक्षीय भागीदारी

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को लेकर ट्रम्प का नज़रिया दिखाता है कि वो बहुपक्षीय भागीदारी के लिए इच्छुक नहीं हैं, जैसा कि पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने, विश्व व्यापार संगठन की प्रक्रिया में रुकावट डालने और नाटो गठबंधन को “चुपचाप छोड़ने” के ट्रम्प के सुझाव में दिखा है।

हालांकि, एडवांस्ड AI मॉडल के जोखिमों के मूल्यांकन पर फोकस्ड AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट्स (AISI) का बहुपक्षीय नेटवर्क ट्रम्प प्रशासन के तहत काम करता रह सकता है। नवंबर 2024 में सैन फ्रांसिस्को में आधिकारिक लॉन्च मीटिंग के बाद इस नेटवर्क ने रफ्तार पकड़ी है। अपना खुद का AISI बनाने की इच्छा रखने वाले, भारत जैसे देशों की भागीदारी इस नेटवर्क के बढ़ते असर और इसमें अमेरिकी AISI के लीडरशिप रोल को दर्शाता है। इसके अलावा, अमेरिका के दोनों बड़े राजनीतिक दलों के सपोर्ट और रणनीतिक महत्ता को देखते हुए लगता है कि अमेरिकी AISI की पोज़िशन सुरक्षित है। "अमेरिका फर्स्ट" के नज़रिए से भी, अमेरिकी AISI की भूमिका को बनाए रखना व्यावहारिक है - अगर अमेरिका में विकसित AI मॉडलों का मूल्यांकन घरेलू स्तर पर नहीं होता है, तो फिर इस बात का जोखिम रहेगा कि उनका मूल्यांकन UK, EU, सिंगापुर और दूसरी जगहों के AISI करेंगे।

GTS इनोवेशन डायलॉग में परिचर्चाओं में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कैसे भारत और अमेरिका AI की साझा तकनीकी समझ विकसित कर सकते हैं और AI सुरक्षा पर सहयोग कर सकते हैं - अमेरिकी AISI "अपस्ट्रीम" फाउंडेशनल मॉडलों की सुरक्षा का मूल्यांकन करने में मदद कर सकता है जबकि भारत अपनी स्थानीय ज़रूरतों के मुताबिक "डाउनस्ट्रीम" एप्लिकेशंस की सुरक्षा का मूल्यांकन कर सकता है। हालांकि, चर्चा में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि "सुरक्षा" की परिभाषा भारत की स्थानीय ज़रूरत से मेल खानी चाहिए और उसमें AI का इस्तेमाल करते हुए इनोवेशन और डेवलपमेंट एजेंडा दिखना चाहिए।

निष्कर्ष

ट्रम्प के AI एजेंडे के अलग-अलग पहलुओं पर अलग-अलग स्तर की अनिश्चितता को देखते हुए, इस लेख में चर्चा में आए मुद्दों पर नए प्रशासन के दौरान नज़र रहेगी। इसके अलावा, AI इनोवेशन की अनिश्चित गति और प्रकृति जोखिम कम करने के काम को एक गंभीर चुनौती बना देगी। ये अनिश्चितताएं न केवल अमेरिका में AI विकास को बल्कि दुनिया भर में तकनीकी दिशा को भी आकार देंगी।

लेखक

शतक्रतु साहू
फॉर्मर रिसर्च एनालिस्ट एंड सीनियर प्रोग्राम मैनेजर, टेक्नोलॉजी एंड सोसायटी प्रोग्राम
शतक्रतु साहू
अमलान मोहंती
फेलो
अमलान मोहंती
TechnologyAIForeign Policyउत्तरी अमेरिकाIndiaचीनअमेरिका

कार्नेगी सार्वजनिक नीति मुद्दों पर संस्थागत पद नहीं लेता; यहाँ व्यक्त विचार लेखक(ओं) के हैं और जरूरी नहीं कि वे कार्नेगी, उसके कर्मचारियों या ट्रस्टियों के विचारों को दर्शाते हों।

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