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Carnegie India

एआई सुरक्षा संस्थानों का महत्व

यह लेख दुनिया भर में एआई सुरक्षा संस्थानों के विकास का पता लगाता है, अलग-अलग राष्ट्रीय दृष्टिकोणों की खोज करता है, और भारत में एआई सुरक्षा संस्थान की ज़रूरत की जांच करता है।

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द्वारा अमलान मोहंती और तेजस भारद्वाज
पर प्रकाशित 21 अग॰ 2024
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परियोजना

टेक्नोलॉजी एंड सोसायटी

यह कार्यक्रम पांच प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित है: डेटा गवर्नेंस और प्राइवेसी; सेमीकंडक्टर और रक्षा समेत रणनीतिक प्रौद्योगिकी; एआई और जैव सुरक्षा जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी; तेज़ विकास और राज्यों के बीच आपसी संवाद पर फोकस के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर; और महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकी पर भारत-अमेरिका पहल और यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद जैसी रणनीतिक साझेदारी।

और अधिक जानें

भूमिका

मई 2024 में आयोजित एआई सियोल शिखर सम्मेलन में, बीस से ज़्यादा देशों ने “एआई (AI) जोखिम प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और एआई सेफ्टी और सिक्योरिटी में वैश्विक समझ बढ़ाने” के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेफ्टी इंस्टीट्यूट्स की भूमिका का समर्थन किया।

संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और यूरोपीय संघ समेत एआई विकास में सबसे आगे रहने वाले देशों ने सियोल घोषणा पर दस्तखत किए। इसने पहले से स्थापित संस्थानों के माध्यम से एआई सुरक्षा के लिए पहले से ज़्यादा सहयोग वाले और बहुपक्षीय दृष्टिकोण के लिए आधार तैयार किया है।

भारत ने सियोल मंत्रिस्तरीय वक्तव्य में हिस्सा लिया है, जिससे पता चलता है कि एक राष्ट्रीय एआई सुरक्षा संस्थान के लिए राजनीतिक इच्छा मौजूद है जो एआई सुरक्षा पर आगे की बातचीत में योगदान कर सकती है।

इस लेख में, हम दुनिया भर में एआई सुरक्षा संस्थानों के विकास का पता लगा रहे हैं, अलग-अलग राष्ट्रीय दृष्टिकोणों की खोज कर रहे हैं, और भारत में एआई सुरक्षा संस्थान की ज़रूरत की जांच कर रहे हैं।

ब्लेचली प्रभाव

नवंबर 2022 में ChatGPT के लॉन्च ने नीति निर्माताओं को एआई के उभरते जोखिमों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। इन विचार-विमर्शों का नतीजा यह  निकला कि G7, G20, GPAI और UN में एआई के सुरक्षित विकास और उपयोग के लिए वैश्विक सिद्धांतों को अपनाया गया है।

इस दौरान, यूनाइटेड किंगडम "फ्रंटियर मॉडल" के जरिए पैदा जोखिमों की पहचान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। फ्रंटियर मॉडल का मतलब उन “हाईली कैपेबल जनरल पर्पस एआई मॉडलों से है जो ढेरों तरह के काम कर सकते हैं और मौजूदा एडवांस्ड मॉडल की क्षमताओं की बराबरी कर सकते हैं या उनसे आगे निकल सकते हैं।"

नवंबर 2023 में यूनाइटेड किंगडम द्वारा ब्लेचली पार्क में आयोजित पहले एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन ने फ्रंटियर मॉडलों के जोखिमों और एआई मॉडल के परीक्षण पर वैश्विक मानदंडों की ज़रूरत के बारे में साझा समझ विकसित करने में मदद की।

इस वक्त तक, कंपनियों के लिए नियम था कि वे फ्रंटियर मॉडलों के संभावित जोखिमों के बारे में सरकारी अधिकारियों को जानकारी दें। ब्लेचली में, हिस्सा लेने वाली कंपनियों ने अपने नवीनतम एआई मॉडलों के स्वतंत्र परीक्षण के लिए प्रतिबद्धता जताई - जो पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रक्रिया से “एआई सुरक्षा संस्थान” की अवधारणा भी सामने आई। यूके ने रिसर्च कोऑर्डिनेशन और फ्रंटियर मॉडलों के परीक्षण के लिए अपनी आंतरिक क्षमताओं को तैयार करने के लिए एआई सुरक्षा संस्थान लॉन्च किए। इसके तुरंत बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, सिंगापुर, कनाडा और यूरोपीय संघ में एआई सुरक्षा संस्थान स्थापित किए गए, इस प्रक्रिया को अब “ब्लेचली प्रभाव” कहा जा रहा है।

मई में यूके और दक्षिण कोरिया के संयुक्त रूप से आयोजित सियोल शिखर सम्मेलन में एआई सुरक्षा संस्थानों की अवधारणा में तेज़ी आई। सियोल घोषणापत्र ने न केवल अलग-अलग देशों में एआई सुरक्षा संस्थान बनाने का समर्थन किया, बल्कि एआई सुरक्षा पर पहले से ज़्यादा बहुपक्षीय सहयोग के लिए ऐसे संस्थानों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बनाने का भी प्रस्ताव रखा।

एआई सुरक्षा के लिए एक ग्लोबल नेटवर्क

“एआई सुरक्षा संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क” का आधार है सियोल शिखर सम्मेलन में यूरोपीय यूनियन के अलावा दस देशों - ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूके - में इस मकसद से जारी किया गया बयान, जिस पर इन देशों ने दस्तखत किए थे। इस ग्लोबल नेटवर्क का मकसद सरकारों को बेस्ट प्रैक्टिस विकसित करने, परीक्षण के लिए संसाधन साझा करने, निष्कर्षों का लेन-देन करने और एआई की विशिष्ट घटनाओं और उनसे होने वाले नुकसान पर नज़र रखने में सहयोग करने में सक्षम बनाना है।

एआई सुरक्षा संस्थान आमतौर पर सरकारी पैसे से चलने वाले और सरकार के सपोर्ट से चलते हैं। वे एआई के जोखिमों को समझने और उन्हें कम करने में मदद करने के लिए सरकारों को तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधन देते हैं। वे नीति निर्माताओं को जोखिम-आधारित रणनीति तैयार करने और एआई मॉडल की सुरक्षा का मूल्यांकन करने में भी मदद करते हैं (यूके का एआई सुरक्षा संस्थान पहले ही पांच एआई मॉडलों की जांच कर चुका है)।

कुछ मामलों में राष्ट्रीय दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं। जैसे, अमेरिका में एआई सुरक्षा संस्थान राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएसटी) के तहत स्थापित किया गया है, जो एक मानक-निर्धारण निकाय है। इस बीच, सिंगापुर ने नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में मौजूदा डिजिटल ट्रस्ट सेंटर को अपने एआई सुरक्षा संस्थान का दर्जा दिया है। कानून लागू कराने वाली शक्तियों में भी अंतर हैं। जैसे, यूरोपीय यूनियन का एआई ऑफिस, जो यूरोपीय यूनियन के एआई सुरक्षा संस्थान के रूप में काम करता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्ट के तहत कानूनी ताक़तों का इस्तेमाल कर सकता है, जबकि यूके के एआई सुरक्षा संस्थान के पास कोई रेगुलेटरी ताक़त नहीं हैं।

यह सुनिश्चित करना कि इन संस्थानों द्वारा विकसित किए गए फ्रेमवर्क, उनके ढांचागत और काम से जुड़े फर्क के बावजूद ‘एक-दूसरे के साथ जानकारी का लेन-देन और इस्तेमाल करने में सक्षम’ हों, ग्लोबल नेटवर्क की कामयाबी का एक मुख्य पैमाना होगा।

भारत के लिए एआई सुरक्षा संस्थान?

एआई सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत के लिए एक नीतिगत अनिवार्यता है। यह एआई मिशन में ‘सातवें स्तंभ’ के तौर पर मुख्य रूप से शामिल है, और एआई रेगुलेशन पर मौजूदा बहस का आधार है। एआई सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी उपकरणों और फ्रेमवर्क के विकास के साथ, एक राष्ट्रीय एआई सुरक्षा संस्थान ज़रूरी विशेषज्ञता और संस्थागत समर्थन मुहैया करा सकता है।

प्राइवेट सेक्टर की तरफ से एक राष्ट्रीय एआई सुरक्षा संस्थान बनाने का सपोर्ट किए जाने की उम्मीद है। एआई सुरक्षा और परीक्षण में राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण भारी-भरकम नियम-कानूनों का मुकाबला करने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में एक-दूसरे के साथ जानकारी के लेन-देन और इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

साथ ही, भारत ने एआई सुरक्षा पर ग्लोबल बहस में सक्रिय रूप से भाग लिया है। भारत ने ब्लेचली घोषणापत्र पर दस्तखत किए हैं और सियोल मंत्रिस्तरीय वक्तव्य का हिस्सा है, दोनों ही एआई सुरक्षा संस्थानों के आइडिया का समर्थन करते हैं। अपना राष्ट्रीय एआई सुरक्षा संस्थान स्थापित करने से इन चर्चाओं में भारत की लगातार भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिनमें फ्रांस में होने वाला अगला एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन भी शामिल है।

अब भारत सरकार के लिए प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाने और राष्ट्रीय एआई सुरक्षा संस्थान की ज़रूरत पर रणनीतिक संवाद आयोजित करने का सही समय है।

लेखक

अमलान मोहंती
फेलो
अमलान मोहंती
तेजस भारद्वाज
रिसर्च एनालिस्ट
तेजस भारद्वाज
TechnologyAIIndia

कार्नेगी सार्वजनिक नीति मुद्दों पर संस्थागत पद नहीं लेता; यहाँ व्यक्त विचार लेखक(ओं) के हैं और जरूरी नहीं कि वे कार्नेगी, उसके कर्मचारियों या ट्रस्टियों के विचारों को दर्शाते हों।

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